विकसित भारत के लिए मेरा दृष्टिकोण My Vision for a Developed India

यह निबंध ‘वीर बाल दिवस’ के अवसर पर आयोजित स्कूल प्रतियोगिता के लिए तैयार किया गया है। यह निबंध दिए गए सभी मुख्य विचार बिंदुओं को शामिल करते हुए 2047 के भारत का एक सशक्त और सकारात्मक खाका खींचता है।

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निबंध प्रतियोगिता हेतु

विषय: विकसित भारत के लिए मेरा दृष्टिकोण (My Vision for a Developed India)

शीर्षक: अमृत काल का स्वप्न: 2047 में विकसित भारत के लिए मेरा दृष्टिकोण

प्रस्तावना

आज जब हमारा देश ‘वीर बाल दिवस’ पर साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह जी के अदम्य साहस और बलिदान को नमन कर रहा है, तो हमारे सामने भविष्य का एक बड़ा प्रश्न भी खड़ा है। वह प्रश्न है- हम कैसा भारत बनाना चाहते हैं? हम ‘अमृत काल’ से गुजर रहे हैं और वर्ष 2047 में हमारी आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे। एक छात्र के रूप में, जब मैं 2047 के भारत की कल्पना करता हूँ, तो मुझे सिर्फ गगनचुंबी इमारतें या बुलेट ट्रेनें नहीं दिखतीं, बल्कि मुझे एक ऐसा राष्ट्र दिखता है जो अपनी जड़ों से जुड़ा हो और आसमान छूने का हौसला रखता हो। विकसित भारत के लिए मेरा दृष्टिकोण समग्र विकास का है, जहाँ समृद्धि के साथ-साथ मानवीय मूल्य भी सर्वोपरि हों।

शिक्षा और कौशल: रटने से रचने की ओर

मेरे सपनों के विकसित भारत की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था होगी। 2047 का भारत वह होगा जहाँ शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्रियां बटोरना या किताबों को रटना नहीं होगा। मेरा दृष्टिकोण एक ऐसी शिक्षा प्रणाली का है जो कौशल (Skill) पर आधारित हो।

आज हमें ‘ज्ञान’ के साथ-साथ ‘हुनर’ की जरूरत है। भविष्य के भारत में स्कूलों में बच्चों को बचपन से ही कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बढ़ईगीरी, खेती या रोबोटिक्स जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएंगे। शिक्षा ऐसी होगी जो युवाओं को केवल ‘नौकरी मांगने वाला’ नहीं, बल्कि ‘नौकरी देने वाला’ (Job Creator) बनाएगी। जब भारत का हर युवा हुनरमंद होगा, तभी देश सही मायने में विकसित होगा।

तकनीक: डिजिटल विश्वगुरु बनता भारत

21वीं सदी तकनीक की सदी है। 2047 में, मेरा भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आविष्कारक होगा। मेरा दृष्टिकोण है कि भारत डिजिटल क्षेत्र में ‘विश्वगुरु’ बने।

चाहे अंतरिक्ष विज्ञान हो, रक्षा तकनीक हो या साइबर सुरक्षा, दुनिया भारत की ओर देखेगी। तकनीक का उपयोग केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सुदूर गांवों के किसानों तक पहुंचेगा। डिजिटल इंडिया का अर्थ होगा—भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी व्यवस्था और हर नागरिक के हाथ में सुविधाओं की ताकत।

स्वास्थ्य: हर जीवन अनमोल

एक बीमार राष्ट्र कभी विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। 2047 के लिए मेरा विजन एक ऐसे स्वस्थ भारत का है, जहाँ किसी गरीब को इलाज के अभाव में दम न तोड़ना पड़े।

स्वास्थ्य सेवाएं केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार होंगी। देश के हर कोने में विश्वस्तरीय अस्पताल और डॉक्टर उपलब्ध होंगे। आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ हमारी पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को भी वैश्विक मान्यता मिलेगी। एक स्वस्थ नागरिक ही एक समर्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।

आत्मनिर्भरता: दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब

विकसित भारत का मतलब है—आत्मनिर्भर भारत। मेरा सपना है कि 2047 तक भारत अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पूरी तरह छोड़ दे।

हम सिर्फ आयात (Import) करने वाले देश नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों (Exporters) में से एक होंगे। ‘मेक इन इंडिया’ के उत्पाद—चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक चिप हो, रक्षा उपकरण हों या खिलौने—दुनिया भर के बाजारों में छा जाएंगे। हमारी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत होगी कि वैश्विक मंदी की लहरें भी हमें डिगा नहीं पाएंगी।

समानता और सामाजिक समरसता: विकास की आत्मा

अंत में, सबसे महत्वपूर्ण पहलू। भौतिक विकास तब तक अधूरा है जब तक समाज में समानता न हो। मेरे सपनों का विकसित भारत वह है जो जाति, धर्म, भाषा और लिंग के भेदभाव से पूरी तरह मुक्त हो।

वीर बाल दिवस पर हमें गुरुओं की उस सीख को याद रखना है कि ‘मानस की जात सबै एकै पहचानबो’ (पूरी मानवता एक है)। 2047 का भारत वह होगा जहाँ एक गरीब का बच्चा और एक अमीर का बच्चा एक ही स्कूल बेंच पर बैठकर भविष्य के सपने बुनेंगे। जहाँ महिलाओं को सुरक्षा के साथ-साथ समान अवसर भी मिलेंगे। सामाजिक समरसता ही विकसित भारत की आत्मा होगी।

निष्कर्ष

2047 में विकसित भारत का यह सपना बड़ा जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। इस सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी हम युवाओं के कंधों पर है। साहिबजादों ने छोटी सी उम्र में जो संकल्प शक्ति दिखाई थी, उसी संकल्प की आज हमें राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यकता है।

जब 140 करोड़ भारतीय शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और समानता के इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक साथ कदम बढ़ाएंगे, तो दुनिया की कोई ताकत भारत को 2047 तक एक महाशक्ति बनने से नहीं रोक सकती। आइए, इस वीर बाल दिवस पर हम एक समर्थ, सशक्त और विकसित भारत बनाने का संकल्प लें।

जय हिन्द।


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